विद्यापति गौरव मंच अपनेक स्वागत आ अभिनंदन करैत अच्छी , स्थान - विद्यापति कॉलोनी जलपुरा ग्रेटर नॉएडा उ० प्र० -२०१३०८ E-mail: vidyapatigouravmanch@gmail.com mo-9312460150 , 9818999023

रविवार, 22 अक्तूबर 2017

छैठ


 || छैठ ||  

लू  सजि  सखी घाट लय  ढाकी  
 छैठक     कोसिया          कुरवार  | 
सजल अछि झुण्डक झुण्ड कतार 
कोकिल     कण्डे  सुमधुर    वाणी  
छैठिक    गीत  गाबैथ  मिथिलानी 
नव    अँचार    पर  नाचय   नटुआ 
घुँघरु           के            झनकार || 
                        सजल  अछि -------
जेहन जिनकअछी कबूला पाती 
घाटे  भरल   तेहन  अछि   पाँती 
अस्सी  बरखक  बुढ़ियो  जल में  
कोनियाँ        लेने           ठार  ||  
                     सजल  अछि ---------
ठकु   आ  भुसबा     लड़ू     पेडा 
पान   फूल    फल   पीयर   केरा 
हाथी  ऊपर सजल अछि  दीया 
ढाकी        में         कुसियार  ||  
                     सजल  अछि -------
हे    दिनकर , हे     राणा    मैया  
हमर  कियो  नञि  नाव  खेबैया 
बीच    भवँर   में उबडूब    जीवन 
अहिं        "रमणक "   पतवार  || 
             सजल  अछि -----
 चलू  सजि  ---छैठक  कोसिया ---
                       सजल  अछि -------

रचित - 
रेवती रमण झा "रमण "

मंगलवार, 17 अक्तूबर 2017

दीयावाती

|| दीयावाती ||

मनुहारी       अति    दिव्य 
सघन  वर  दीपक माला  | 
बाल     वृन्द  बहु  ललित 
चारु    चित चंचल बाला || 
आयल  उतरि  अपवर्ग धरा 
रे, चित   चकित चहुँ ओर  | 
फुल झरी झरि रहल लुभावन  
मन       आनंन्द    विभोर  || 
हुक्का   लोली  बीचे  अड़िपन 
 चमकि  उठल  अच्छी अंगना | 
 मृगनयनी  चहुँ चारु दीया लय 
रून - झुन   बाजल  कंगना || 
सिद्धि  विनायक मंगल दाता  
भक्ति    भाव       स्वीकारु  | 
अन - धन  देवी लक्ष्मी मैया 
"रमणक " दोष  बिसारू || 
लेखक - 



रेवती रमण  झा "रमण" 

बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

दियावाती

|| दियावाती || 


चारूकात  चकमक  दीप  जरैया 
जहिना      पसरल    भोर   रे  | 
लक्ष्मी ठारि हँसै छथि  खल-खल 
देखू     अंगना     मोर       रे  || 
पसरल  दीया   कतारे  सभतरि 
परहित    काज   करैया     यौ | 
अपन     गाते  सतत   जराकय 
जग   में  ज्योति  भरैया   यौ || 
अधम - अन्हरिया भागल चटदय 
धरमक    भरल      इजोर      रे  || 
                       लक्ष्मी  ठारि--  देखू   अंगना --
नीपल   आँगन  ,अड़िपन ढोरल 
चौमुख बारि कलश पर साजल  | 
 छितरल  चहुँ दिश  आमक पल्लव 
सिन्दूर    ठोप  पिठारे   लागल  || 
आँगन  अनुपम रचि  मिथिलानी 
लाले      पहिर     पटोर          रे || 
                   लक्ष्मी ठारि-- देखू   अंगना --
एक  दंत   मुख  वक्रतुण्ड  छवि  
गौरी      नन्दन      आबू      ने  | 
दुख    दारिद्रक    हारणी   हे  माँ 
ममता    आबि    देखाबू       ने  || 
अति आनंदक लहरि में टपटप देखल 
"रमणक "    आँखि   में  नोर   रे ||
                           लक्ष्मी ठारि-- देखू   अंगना --
रचित - 

रेवती रमण झा " रमण" 

रविवार, 1 अक्तूबर 2017

दिल्ली में सभागाछी (वर-बधु परिचय सम्मेलन)

दिल्ली में सभागाछी (वर-बधु परिचय सम्मेलन)
( पंजीकरण केर अंतिम तिथि : 05 अक्टूबर)
विवाह योग्य लड़का आ लड़की के अभिभावक के लेल योग्य वर आ बधु के चयन सभ स' कठिन काज अछि। एहि समस्याक समाधान हेतु 
दिल्ली में अभूतपूर्व ऐतिहासिक कार्यक्रम के आयोजन कायल जा रहल अछि , जाहि में अभिभावक योग्यतानुसार सरलता आ सुगमता स' वर आ वधू के चयन क' सकताह ।
कार्यक्रम में सम्मिलित हेबाक लेल विवाह योग्य संभावित वर आ वधू के परिचय , बॉयोडाटा भेजू । हजारों के संख्या में उपलब्ध 'कथा' में अपना उम्मीदवार लेल योग्य कथा के चयन करू । 05 नवंबर के दिल्ली के हॉज खास क्षेत्र में स्थित 'श्रीफोर्ट सभागार' में आधुनिक सभागाछी में उपस्थित अभिभावक , वर , वधू स' आमने सामने बातचीत करू आ योग्य एवं सफल जोड़ी बनेबाक लेल आगू बढू ।
समस्त मैथिल भाई बन्धु , सखी बहिनपा स' अनुरोध जे एहि महान सामाजिक कार्य के लेल योग्य वर-बधु के बॉयोडाटा तुरंत पठाऊ । परिचय मेल स' भेज सकय छी । सीधा वेबसाइट पर अपलोड क' सकय छी । WhatsApp क' सकयत छी । कोनों प्रकारक जानकारी के लेल फोन क' सकय छी ।
पोस्ट के शेयर अवश्य करी । एहि महान सामाजिक कार्य में हर एक मैथिल स' सहयोग अपेक्षित ।
सुनीत ठाकुर ,
कार्यकारिणी सदस्य, मैथिल समन्वय समिति, दिल्ली । संपर्क सूत्र : 8700615846, 9711117728.
WhatsApp: 9711117728
मुंबई टोलफ्री नं: 18001202714
E-mail: mssmaithil2017@gmail.com
matrimony@maithil.org
Website:www.matrimony.maithil.org

HAWAN - DEKHAL AA SUNAL JAO , JAI MATA DI


बुधवार, 20 सितंबर 2017

मंगलवार, 5 सितंबर 2017

संक्षिप्त पितृ तर्पण विधि:

  तर्पण मन्त्र -TARPAN MANTRAS

आवाहन: दोनों हाथों की अनामिका (छोटी तथा बड़ी उँगलियों के बीच की उंगली) में कुश (एक प्रकार की घास) की पवित्री (उंगली में लपेटकर दोनों सिरे ऐंठकर अंगूठी की तरह छल्ला) पहनकर, बाएं कंधे पर सफेद वस्त्र डालकर  दोनों हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों को निम्न मन्त्र से आमंत्रित करें 

'ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम'  
ॐ हे पितरों! पधारिये तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए।  

तर्पण: जल अर्पित करें 
निम्न में से प्रत्येक को 3 बार किसी पवित्र नदी, तालाब, झील या अन्य स्रोत (गंगा / नर्मदा जल पवित्रतम माने गए हैं) के शुद्ध जल में थोडा सा दूध, तिल तथा जावा मिला कर जलांजलि अर्पित करें। 

पिता हेतु  --

(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मतपिता पिता का नाम शर्मा वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
------. गोत्र के मेरे पिता श्री वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों।  
तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।

उक्त में अस्मत्पिता के स्थान पर अस्मत्पितामह पढ़ें  --

पिता के नाम के स्थान पर पितामां का नाम लें ----
माता हेतु  तर्पण  - 
(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मन्माता माता का नाम देवी वसुरूपास्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) 
तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
 ........... गोत्र की मेरी माता श्रीमती ....... देवी वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों। तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः। 
निस्संदेह मन्त्र श्रद्धा अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम हैं किन्तु भावना, सम्मान तथा अनुभूति अन्यतम हैं।

जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें 

______________________________________________________________________________ 
संक्षिप्त पितृ तर्पण विधि:
 पितरोंका तर्पण करनेके पूर्व इस मन्त्र से हाथ जोडकर प्रथम उनका आवाहन करे -
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्तु जलान्जलिम ।

अब तिलके साथ तीन-तीन जलान्जलियां दें -
(पिता के लिये)
अमुकगोत्रः अस्मत्पिता अमुक (नाम) शर्मा वसुरूपस्तृप्यतामिदं तिलोदकं (गंगाजलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः ।
(माता के लिये)
अमुकगोत्रा अस्मन्माता अमुकी (नाम) देवी वसुरूपा तृप्यतामिदं तिलोदकं तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः ।
जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें